हरियाणा पराली प्रोत्साहन योजना की जानकारी- पराली @Rs.100 per Quintal

हरियाणा पराली प्रोत्साहन योजना 2020

क्या हरियाणा पराली प्रोत्साहन योजना से हल होगी वायु प्रदूषण की समस्या: हरियाणा सरकार की ओर से पराली (स्टबल) प्रोत्साहन योजना शुरू की गई है। इस योजना के द्वारा राज्य सरकार छोटे और सीमांत किसानों को विशेष लाभ पहुंचेगा। इसके तहत किसानों को 100 रुपये प्रति क्विंटल का समर्थन राशि प्राप्त होगी। जिन किसानों ने अपने खेतों में पराली अब तक नहीं जलाई है। उन्हें यह रकम केवल सरकार द्वारा खरीदे (Purchace) गए गैर-बासमती धान पर ही लागू होगी। इस योजना का मूल उद्देश्य किसानों को पराली (Stubble) ना जलाने के लिए प्रोत्साहित करना। डिप्टी कमिश्नर के माध्यम से स्टबल प्रोत्साहन प्रदान किया जाएगा।

हरियाणा पराली प्रोत्साहन योजना (Haryana Stubble Incentive Scheme) में सहभागी लाभार्थियों की संख्या और अनुमानित लागत सीएम की मंजूरी के देने बाद पता चल सकेगा।अनुमानित तौर पर, हरियाणा में तकरीबन 20 लाख कृषक 5 एकड़ से भी कम भूमि के खेती बाड़ी करते है। वहीं सरकार के पास उपरोक्त किसानों की भूमि का और बैंक खातों की समस्त जानकारी उपलब्ध है।

सर्वप्रथम ठूंठ जलाने पर प्रतिबंध लगाने का प्रस्ताव मुख्यमंत्री मनोहर लाल खट्टर को भेजा गया। उन्हीं का निर्णय इसमें अंतिम माना जाएगा। दिल्ली एनसीआर क्षेत्र में वायु प्रदूषण की गंभीरता को देखते हुए सुप्रीम कोर्ट ने अधिकारियों को फटकार लगाई है। सुप्रीम कोर्ट ने दिल्ली से जुड़े पंजाब ,हरियाणा और उत्तर प्रदेश की सरकारों को दिशा निर्देश दिए हैं, कि वे अपने प्रदेश के किसानों को फसलों के अवशेष यानी पराली जलाने पर प्रतिबंध लगा दे। और इसके एवज में सौ रुपए प्रति क्विंटल सहयोग राशि दी जाए, जिससे कि Haryana Govt Parali Incentive Scheme प्रोत्साहित हो सके।

हरियाणा पराली प्रोत्साहन योजना को संक्षिप्त में जाने

संचालित योजना का नाम हरियाणा पराली प्रोत्साहन योजना
लाभार्थीहरियाणा क्षेत्र के कृषक
योजना का उद्देश्यवायु प्रदूषण को रोकना
प्रोत्साहन राशि100 रुपये प्रति क्विंटल
योजना प्रारंभ की गईहरियाणा सरकार

✅ Haryana Parali Incentive Scheme :प्रारंभ करने के पीछे उद्देश्य

खेतिहर कृषक अनुपयोगी फसल के हिस्से यानी ठूंठ को जला देते हैं क्योंकि यह भूमि की उपयोगिता के लिए बाधक सिद्ध होता है। परंतु पराली जलाना वर्तमान के दिनों में वायु प्रदूषण को बढ़ाने में प्रमुख कारण माना जा रहा है। हरियाणा और पंजाब के कई किसान अगले सीजन की फसल लगाने और भूमि की उर्वरता को बढ़ाने के दृष्टिकोण से पराली को जलाते हैं। जिससे कि उनकी भूमि की उर्वरा शक्ति (fertility power) बढ़े।

परंतु पराली जलाने से इसमें से निकलने वाले धुएं में प्रदूषक तत्व पाए जाते हैं। जो उस क्षेत्र को तो प्रभावित करते हैं। परंतु वर्तमान में यह निकटवर्ती राज्य जैसे दिल्ली एनसीआर में भी फैल रहा है और यह एक गंभीर समस्या है । दिल्ली का एनसीटी वायु गुणवत्ता सूचकांक (AQI) के हानिकारक इस तरह के परिणाम स्वरूप वर्तमान में गैस चैंबर की तरह है।

पराली जलाए जाने के परिणाम स्वरूप राष्ट्रीय राजधानी में पीएम 2.5 और पीएम 10 का स्तर खतरनाक स्तर के अंतर्गत आता है। सुप्रीम कोर्ट ने सर्वप्रथम इन दो राज्यों के ऊपर प्रतिबंध लगाने का आदेश पारित किया। परंतु पराली जलाने वाले कृषकों की संख्या में कमी नहीं हो रही थी। इसके पीछे कारण हरियाणा और पंजाब दोनों में कृषक गरीब श्रेणी के आते हैं। इसे रोकने के लिए सरकार को कोई बड़ा कदम उठाना होगा तभी यह समस्या नियंत्रण में आ सकेगी।

✅ Haryana Govt Parali Incentive Scheme की आवश्यकता क्यों हुई

ठूंठ यानी पराली जलाने के लिए एक विशेष प्रकार की मशीन की आवश्यकता पड़ती है। जिसकी कीमत आम किसान की पहुंच से बाहर है। केंद्रीय सरकार से सब्सिडी मिले के बावजूद भी इसकी कीमत तकरीबन 15 लाख प्रति मशीन आती है। इसके अतिरिक्त पराली मशीन का किराया भी किसानों के लिए एक अतिरिक्त बोझ साबित होता है और वह इस खर्च को वहन करने के सामर्थ नहीं है। इसीलिए दिल्ली में प्रदूषण के स्तर को घटाने के लिए सुप्रीम कोर्ट और हरियाणा राज्य के किसानों को ₹100 प्रति कुंटल सहयोग राशि देने का आदेश दिया गया। जिससे कि किसानों को आर्थिक रूप से हानि ना हो।

सुप्रीम कोर्ट के द्वारा दिए गए आदेश के अनुसार हरियाणा सरकार पराली प्रोत्साहन योजना को प्रारंभ करने का फैसला लिया है इस योजना के अंतर्गत राज्य सरकार के छोटे एवं सीमांत किसानों को ₹100 प्रति क्विंटल सहयोग राशि प्रदान की जाएगी यह राशि उन्हीं को प्राप्त होगी जिन्होंने पराली नहीं चलाया है इस योजना का लाभ केवल पंजाब हरियाणा उत्तर प्रदेश और राष्ट्रीय राजधानी क्षेत्र से जुड़े प्रदेश के नागरिकों को ही मिलेगा इस योजना के तहत फसलों के अवशेषों को उसी स्थान पर निपटाने को बल दिया जाएगा

दिल्ली-एनसीआर क्षेत्र में गंभीर वायु प्रदूषण को रोकने में विफल रहने के लिए सुप्रीम कोर्ट ने अधिकारियों को फटकार लगाई है। SC ने पंजाब, हरियाणा और उत्तर प्रदेश की सरकारों को निर्देश दिया था कि वे किसानों को डंठल न जलाने के लिए सात दिनों के भीतर 100 रुपये / क्विंटल का समर्थन मूल्य प्रदान करें।

✅ स्टबल बर्निंग को रोकने के लिए हरियाणा पराली प्रोत्साहन योजना

पराली (स्टबल) जलना हाल के दिनों में प्रदूषण का एक प्रमुख कारण बन गया है। हरियाणा और पंजाब में कई किसान अगले सीजन की खेती के लिए अपनी खेती की जमीन तैयार करने के लिए अपना पराली जलाते हैं। पराली जलाने से निकलने वाले धुएं में प्रदूषक तत्व होते हैं और यह निकटवर्ती राज्य दिल्ली में फैल रहा है। दिल्ली का एनसीटी वायु गुणवत्ता सूचकांक (एक्यूआई) के हानिकारक स्तरों के कारण इन दिनों गैस चैंबर की तरह है।

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